सुपर फ़ास्ट ट्रेन, मेल और एक्सप्रेस में क्या अंतर होता है? | What Is Difference Between Super Fast and Express Train

दोस्तों आप लोगों ने कभी ना कभी रेल मैं सफ़र जरूर किया होगा, जब आपको कहीं जाना होता है तो आप किसी से ट्रेन का नाम पूछते हैं, कि दिल्ली कौन सी ट्रेन जाती है, या इन्टरनेट पर ऑनलाइन सर्च करते हैं कि इस रूट पर कौन कौनसी ट्रेन चलती हैं.

एक ही रूट पर न जाने कितनी ट्रेने चलती हैं, जिनके नाम अलग अलग होते हैं…. क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि ट्रेन के नाम के पीछे पेसेंजेर, एक्सप्रेस, सुपरफ़ास्ट, या मेल क्यूँ लगा होता है. जैसे कि जोधपुर भोपाल पेसेंजर ट्रेन, पंजाब मेल, हज़रत निज़ामुद्दीन एक्सप्रेस, गुजरात संपर्क क्रांति सुपर फ़ास्ट एक्सप्रेस.

क्या आप जानते हैं कि किसी भी ट्रेन को पैसेंजर, मेल, सुपर फास्ट या फिर एक्सप्रेस का नाम क्यों दिया जाता है?

मेल ट्रेन

आपको शायद यह बात पता ना हो, कई साल पहले पोस्ट ऑफिस की चिट्ठियां, डाक या पार्सल को देशभर में एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचाने के लिए कुछ चुनिंदा ट्रेनों से यह डाक पार्सल भिजवाया जाता था, जिन ट्रेनों में यह डाक पार्सल भेजा जाता था उन ट्रेनों में अलग से एक छोटा सा स्पेशल कोच, यानि की ट्रेन का एक छोटा डब्बा लगा हुआ होता था, और ये हलके मटमैले लाल रंग जैसा होता था.

इस ट्रेन के डिब्बे पर RMS (आरएमएस) लिखा हुआ होता था, आरएमएस का मतलब है ‘रेल मेल सर्विस’ तो उन ट्रेनों को जिनमें यह आरएमएस नाम के डाक पार्सल कोच लगा हुआ करते थे, उन ट्रेनों को मेल ट्रेन कहा जाता था जैसे कि कालका मेल, मुंबई मेल, और पंजाब मेल. तो इस तरह से उन सभी रेलों के नाम के बाद मेल जोड़ दिया गया ताकि पहचानने में आसानी हो कि इस ट्रेन से डाक सेवा की जाती है.

लेकिन बीते वक्त के साथ और अतिरिक्त खर्च के चलते आजकल सभी ट्रेनों से यह RMS कोच को हटा दिया गया है, और अब यह डाक पार्सल सेवा नॉर्मल कोच में ही लाने-ले जाने लगे, लेकिन इन ट्रेनों का नाम वही रह गया इसमें से मेल नहीं हटाया गया.

पेसेंजर ट्रेन

दोस्तों पेसेंजर ट्रेन एक साधारण रेल सेवा होती है, जिसमे सफ़र करते वक़्त एक आम आदमी का धैर्य जवाब से जाता है… क्योंकि ये 30-35 किमी. प्रति घंटे की रफ़्तार से चलती है… और ये कब कहाँ कितनी देर के लिए रुक कर रह जाय इस बात की कोई गारंटी नहीं होती. भोपाल-बीना पेसेंजर, ग्वालियर-आगरा पेसेंजर

एक्सप्रेस ट्रेन

दोस्तों एक्सप्रेस ट्रेन पेसेंजर ट्रेन के मुकाबले थोड़ी अच्छी होती है, इसमें बैठने वाली सीटें भी ठीक-ठाक होती हैं… और ये अपने समय सीमा का भी थोडा ध्यान रखती है. इस ट्रेन की सामान्य स्पीड 40-50 किमी. प्रतिघंटा से लेकर 60-65  किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है. जैसे कि चेन्नई एक्सप्रेस, मुंबई लोकमान्य-तिलक एक्सप्रेस

सुपर फास्ट ट्रेन

दोस्तों यह ऐसी ट्रेनें होती है जिनकी सामान्य स्पीड 50 से 60 किमी. प्रति घंटा से लेकर 80-90 किमी. प्रति घंटा तक हो सकती है. इन ट्रेनों को सुपरफास्ट ट्रेन का नाम दिया गया है, इनकी खास बात यह होती है कि यह छोटे स्टेशनों पर नहीं रुकती और इन ट्रेनों का किराया सामान्य ट्रेन से अधिक होता है.

और जिस रूट पर यह ट्रेन चल रही होती हैं उस रूट पर इनको प्राथमिकता दी जाती है, यानी कि छोटी ट्रेनों को रोककर इनको आगे निकाल दिया जाता है. जिसमें से कुछ ट्रेनों के नाम हम आपको बता रहे हैं जैसे कि गुजरात संपर्क क्रांति सुपर फ़ास्ट एक्सप्रेस, शताब्दी सुपर फ़ास्ट एक्सप्रेस.

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