चायना का बहिष्कार करने से अपना कितना नुकसान होगा?

भारत चीन बॉर्डर पर हुए विवाद को लेकर आज पूरा देश गुस्से में क्योंकि हमारे देश के कई जवान चीन के हमले में शहीद हो गए, और इस वजह से देशभर के नागरिकों ने बायकाट चाइना की मुहिम छेड़ दी है और देश का हर नागरिक आज पूरे ज़ोर-शोर से चायना की बनी चीज़ों का बहिष्कार कर रहा है. भारत में चाइना के खिलाफ सड़कों पर चाइनीस प्रोडक्ट को तोड़कर अपना गुस्सा ज़ाहिर कर रहे हैं.

Boycott China Products in India

कई जगहों पर लोगों ने चाइना के बने टीवी मोबाइल और अन्य प्रोडक्ट्स को सड़क पर पटक पटक तोडा है, लेकिन दोस्तों क्या ऐसा करने से चाइना को कोई अंतर पड़ने वाला है?, बिलकुल नही, ऐसा करने से लोगों को न कोई फायदा होगा और ना ही चाइना को इससे कोई नुक्सान होने वाला है.

क्योंकि चाइना अपनी शैतानी शक्ति, गंदी राजनीति, बढती इकोनोमी, और अपनी लम्बी व्यापारिक गतिविधियों से पूरी दुनिया पर राज़ करना चाहता है. इसलिए चाइना ने अपनी मंशा पूरी दुनिया के सामने जाहिर कर दी है.

यदि आप सच में चाइना को हराना चाहते हैं, तो आपको चाइना की बराबरी करनी होगी, उसका बनाया हुआ सामान तोड़ देने से कुछ नहीं होगा. उसकी कूटनीति को समझें तो आइये दोस्तों जान लेते ही कि चाइना के क्या नापाक इरादे हैं और हम किस तरह से आने वाले वक़्त में चाइना के मनसूबों पर पानी फेर सकते हैं.

चाइना ने सिर्फ भारत पर हमला नही किया बल्कि कई और भी देशों को अपना शिकार बनाया है जैसे के ताइवान, होंकोंग, फिलीपींस ऐसे और भी कई देश हैं जो आज चीन के सामने मजबूर हैं, वो उन पर हुकूमत करना चाहता है. चाइना अकेले भारत के लिए ही नही बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक सिरदर्द बन चुका है.

चीनी लोग किस तरह से व्यापार करते हैं?

पहले आप ये समझिये कि चीनी लोग किस तरह से व्यापार करते हैं. क्योंकि किसी भी देश में पैसा सिर्फ व्यापार करने से ही आता है, भारत से अन्य देश व्यापार क्यों नही करना चाहते, क्योंकी हमारे यहाँ चाइना जैसे सस्ते इलेक्ट्रोनिक पार्ट्स नही बनते हैं.

ज्यादातर देश जापान या चाइना से इन पार्ट्स को इम्पोर्ट करते हैं, भारत में खिलोनों का व्यापार बहुत महगा है, क्योंकि देशी खिलोनें चाइना के मुकाबले कई गुना महँगे होते हैं. इसलिए हमारे यहाँ ज्यादातर चायनीज़ खिलोने ही बिकते हैं.

दोस्तों जब कोई देश दूसरे देश के साथ व्यापार करता है तो उसे कई गुना फायदा होता है, और इससे उस देश की इकोनोमी की ग्रोथ होती है, जो उस देश की GDP बढ़ाने में मदद करती है.

दुनिया भर में लगभग कई देश एक दूसरे के साथ व्यापार करते हैं, और इसके लिए WTO (वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन) नाम की एक ऑर्गेनाइजेशन जो व्यापार करने के नियम बनाती है और एक देश को दूसरे देश में व्यापार करनी की अनुमति दिलाती है.

जब 2001 में चाइना इस ऑर्गेनाइजेशन से जुड़ा तो चाइना ने इसके बने नियमों को मानने से साफ़ इंकार कर दिया, क्योंकि चाइना पूरे देशों में अपना व्यापार करना चाहता था वो भी बिना किसी अड़चन के.

वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक ये नियम था कि जब आप दूसरे देशों के साथ कोई व्यापार करें तो उसे अपनी ट्रेड और गातिविधियों की पूरी जानकारी देनी होगी, लेकिन चाइना ने इसका उल्टा किया उसने पूरी दुनिया में अपने प्रोडक्ट्स बेंचे लेकिन जब खरीदने यानी इम्पोर्ट की बारी आई तो उसने मना कर दिया क्योंकि चाइना अन्य देशों से आयात नही करना चाहता, वो सिर्फ वन साइड बिज़नेस में विशवास रखता है.

अगर उसको किसी सामान की ज़रुरत होती है तो वो उसकी कॉपी बना लेता है. चाइना में गूगल की सर्विस पर बेन है, क्योंकि वो अपने देश की जानकारी बाहर नहीं जाने देना चाहता.

इसलिए वहां YOUTUBE का कॉपी YOUKU चलता है, और गूगल की जगह BAIDU सर्च इंजन चलता है. वंहा का AMAZON ALIBABA है, आप समझ सकते है कि चाइना अपनी जानकारी गुप्त रखना चाहता है.

चाइना में यदि कोई व्यापार करना चाहता है तो उस कम्पनी को चाइनीस कम्पनी बनना होगा और अपने सभी ट्रेडमार्क चाइना को सौंपने होंगे, यानी अपनी तकनीक फ्री में चाइना को देना होगी.

सस्ता सामान यानी के चीप प्रोडक्ट

आखिर दुनिया में चीन ही सबसे सस्ता व्यापार क्यों करता है?, दोस्तों इसकी एक बड़ी वजह ये है. आप हों या कोई और जब हम कोई सामान खरीदते हैं तो उस समय उसकी कीमत को ज़रूर देखते हैं, और जो सस्ता और बढ़िया दिखता है हम उसे खरीद लेते हैं.

चाइना इस नब्ज़ को पहचानता है, और वो जिस देश से भी व्यापार करता है  वहां मिलते वाली चीजों के दाम से अपने सामान का दाम बहुत कम रखता है, जिससे लोकल मेनुफेकचर को घाटा होता है.

भारत में भी एसा ही हो रहा है, क्योंकि चाइना बहुत ही कम कीमत पर अच्छी क्वालिटी के मोबाइल भारत में भेजता है, जिससे भारतीय मोबाइल कम्पनी को घाटा हो, और आज भारत में लगभग 80% मोबाइल चाइनीस हैं. चाइना के मोबाइल मार्किट में आने के बाद लगभग अधिकतर भारतीय मोबाइल कम्पनी बंद हो चुकी हैं, और इसके लिए भारत के पास दूसरा कोई ऑप्शन नही है.

आप सोच रहे है वो इतने सस्ते सामान केसे बना लेते है, चाइना अपनी कंपनियों को इसके बहुत ज्यादा सपोर्ट करती है और उन्हें सस्ता माल बनाने के लिए सबसिडी देती है जिससे ज्यादा से ज्यादा मेनुफेचर हो.

चाइना अपनी करंसी की कीमत जानबूझ कर कम रखता है, ताकि चाइना के लोग कम दामों पर अपना कारोबार करें. इसे करेंसी मेनुपुलेशन कहते हैं, जिससे आपके देश में गरीबी न बड़े और अन्य देशों के लोग भी चाइना प्रोडक्ट कम दामों पर खरीद सकें.

हालांकी ये गलत तरीका है और इसके अमेरिका के प्रेसिडेंट ट्रम्प ने आवाज़ उठाई तो USA CHINA TRADE WAR शुरू कर दिया क्योंकि USA चाइना के राज़ को जान गया और इसिलिय USA ने चाइना प्रोडक्ट्स पर टैक्स बडा दिया जिससे अमरीकी कम से कम चाइना प्रोडक्ट खरीदें.

छोटे-छोटे देशों को क़र्ज़ देता है और अपना हक जमा लेता है

चाइना कई छोटे-छोटे देशों को विकास के लिए उन्हें क़र्ज़ देता है, और क़र्ज़ न लौटाने पर वह उस देश पर अपना हक जमा लेता है, कई सारे गरीब देश आज चाइना के क़र्ज़ में डूबे हुए है जिसमें अफ्रीका, केन्या, ज्म्बया, श्रीलंका जैसे देश भी शामिल हैं.

चाइना ने अफ्रीका में विकास के नाम पर काफी रोड, ब्रिज और दूसरे कई प्रोजेक्ट बनवाये और क़र्ज़ न लौटाने की स्तिथि में वहाँ सड़कों और पुलों पर अपना कब्जा जमा लिया.

जमब्या देश को कर्ज़ में डुबो कर आज वो उस पर अपना कब्ज़ा कर के बैठा है. केन्या का प्रसिध्द डाकयार्ड मुम्बासा अपने अधीन कर लिया इतना ही नही श्रीलंका का एक तट भी चाइना ने 99 साल के लीज़ पर लिया है जो भारत के सबसे नजदीकी तटों में से एक है.

दोस्तों अब आप इस शैतान देश की रणनीति समझ ही गए होंगे, आखिर क्यों यह चीन हमेशा सबसे आगे रहता है जिससे USA जैसा बड़ा देश भी आज डर रहा है क्या इतना सब कुछ जानने के बाद भी आप अपने देश में चायना से बने सामान खरीदेंगे?.

चीन हमारे देश से पैसा कमा कर हमारे खिलाफ ही इस्तेमाल करता है, तो सतर्क हो जाएँ Stop Buying Made in China Products in India, Boycott China Products in India.